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बड़ा हादसा-फाल्कन मरीन कारखाने में गैस रिसाव से 120 बीमार, बालेश्वर मुख्य अस्पताल में भर्ती

  • पुलिस ने मामला दर्ज कर कारखाना किया सील

  • पूछताछ के लिए सात कर्मचारी हिरासत में

  • बाल मजदूरी के आरोपों की होगी जांच

  • कंपनी के चेयरमैन तारा पटनायक ने हादसे को दुर्भाग्यजनक बताया

बालेश्वर, गोविन्द राठी – जिले के खांतपाड़ा क्षेत्र में फाल्कन मरीन एक्सपोर्ट्स के स्वामित्व वाली एक झींगा प्रसंस्करण फैक्ट्री में काम करने वाली महिलाओं में से अधिकांश को बुधवार रात को क्लोरीन गैस रिसाव के बाद कथित तौर पर अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह सूचना बालेश्वर के कलेक्टर के सुदर्शन चक्रवर्ती ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए दी। इस मामले की फारेंसिक जांच करायी जायेगी और भुवनेश्वर से टीम को रवाना कर दिया गया है। अस्पताल में भर्ती महिला कर्मचारियों की तादाद करीब 88 है। घटना पनपना स्थित झींगा प्रसंस्करण कारखाने में रात करीब 8:30 बजे हुई।

सूत्रों के अनुसार, सभी प्रभावित संविदाकर्मियों को शुरू में खांतपड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया था और बाद में उन्हें बालेश्वर जिला फकीर मोहन मेडिक्ल कालेज में स्थानांतरित कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, महिला कर्मचारी अपने काम में व्यस्त थीं, तभी उन्हें बेचैनी और सांस लेने में कठिनाई की शिकायत हुई। कंपनी के अधिकारियों ने तुरंत प्रभावित महिलाओं को खांतपाड़ा सीएचसी पहुंचाया। स्थिति का जायजा लेने के लिए बालेश्वर कलेक्टर के.सुदर्शन चक्रवर्ती, पूर्वांचल आईजी दीप्तेश पटनायक एवं बालेश्वर पुलिस अधीक्षक बी जुगल किशोर तुरंत मौके पर पहुंचे। घटनास्थल पर बालेश्वर एवं सोरो से कुल 9 दमकल गाड़ियों को गैस पर कंट्रोल पाने के लिए तैनात किया गया।

उन्होंने कहा कि हमें रात लगभग 9 बजे घटना के बारे में सुचना मिली और तुरंत सभी कर्मचारियों को इलाज के लिए कारखाने से बाहर निकाला गया। अब तक, लगभग 100 रोगियों का अस्पताल में इलाज चल रहा है और कोई भी खतरे में नहीं है। डीएचएच के सभी डाक्टर मरीजों के इलाज के लिए में लगे हुए हैं। कुछ अन्य डाक्टर भी मयूरभंज और कटक एससीबी से यहां लाये गए हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि घटना क्यों घटी, क्लोरीन गैस के रिसाव के कारण ऐसा होने का संदेह है। चक्रवर्ती ने कहा कि कारखाने में काम करने के लिए नाबालिगों की नियुक्ति के आरोपों पर की जांच की जायेगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल हमारा ध्यान लोगों के इलाज पर है। मुख्य जिला चिकित्साधिकारी (सीडीएमओ) ने कहा कि सभी मरीज की हालत नियंत्रण में है।

फाल्कन मरीन एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन तारा पटनायक ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए स्पष्ट किया कि कारखाने के अंदर कोई गैस रिसाव नहीं था और ज्यादा मात्रा में ब्लीचिंग पाउडर छिड़कने के कारण दुर्घटना हुई। कंपनी के अधिकारी सभी कदम उठा रहे हैं और मामले की जांच की जा रही है।

ओडिशा के पुलिस महानिदेशक बीके शर्मा ने बताया कि झींगे के कारखाने को सील कर दिया गया है और यूनिट के 7 कर्मचारियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। कंपनी के खिलाफ खांतपाड़ा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। उधर, इन मरीजों को देखने को लिए बालेश्वर अस्पताल में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन की तरफ से सहदेवखुन्टा थाना अधिकारी परेश राउत एवं टाउन थाना अधिकारी सरोजिनी नायक के नेतृत्व में दो प्लाटून पुलिस फोर्स को अस्पताल परिसर में तैनात करना पड़ा है। अस्पताल में भर्ती हुए मरीजों को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता था कि इस कारखाने में बाल श्रमिकों को कारखाने के काम के लिए नियुक्त किया गया था।

 

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