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खराब विद्युत दाहगृहों की मरम्मत की मांग

  • धुएं से पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर सामाजिक कार्यकर्ता ने जताई चिंता

  • फनी के बाद से खराब पड़े हैं सत्यनगर और कटक के श्मशान घाट पर विद्युत दाहगृह

भुवनेश्वर. देश के साथ-साथ राज्य में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता तथा पूर्व राज्य महिला आयोग की सदस्य नम्रता चड्ढा ने चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि महाचक्रवात फनी के कारण कई श्मशान घाटों पर बिजली और गैस से शवों को जलाने वाले दाहगृहों को काफी नुकसान पहुंचा था, जिसकी मरम्मत आज तक नहीं की है. उन्होंने कहा कि सत्यनगर में श्मशान घाट लंबे समय से बंद है, जबकि कटक में दाहगृह बंद पड़ा है. शवों को जलाने के लिए लोग लकड़ियों का प्रयोग कर रहे हैं, जिसके धुएं से प्रूदषण फैल रहा है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हमारी सरकार के स्वच्छता अभियान और प्रदूषण पर अंकुश लगाने के अथक प्रयास सराहनीय हैं. चाहे वह कल-कारखानों की गन्दगी का निकास हो, वाहनों की जहरीलीं गैसें हों या नदियों की सफ़ाई हो. इतना ही नहीं, घर, शहर, शारीरिक हर त्याज्य मल पर उनका ध्यान गया है. केवल सरकार ही नहीं, निजी संस्थाएं भी इनमें अपना हाथ बंटा रही हैं. सभी वायु, जल तथा ध्वनि प्रदूषण के कारणों को दूर करे में लगे हैं. ये हमारे लिए बड़े गौरव की बात है. विदेशों में जो हमारी गलत छवि दिखाई गई है, उसे सुधारने का प्रयास किया जा रहा है. हम सब इसके साथ हैं. पर इस बीच वायु प्रदूषण के एक मुख्य कारण की ओर हमारा ध्यान नहीं गया, वह है श्मशान घाट. यहां हज़ारों की संख्या में दाह संस्कार पुरानी विधियों से होता है. इसके लिए काफी संख्या में लकड़ियों का प्रयोग किया जाता है. विषैली गैस वातावरण में फैलती है, जो वायु प्रदूषण को बढ़ावा देती है. अस्थि विसर्जन के लिए जलाशयों तथा नदियों को चुना जाता है,  जो जल प्रदूषण का रूप लेता है. लकड़ियों के लिए वनों में कटाई हो रही है, जो ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण है. इससे हमारी जलवायु पर असर पड़ रहा है. कहीं बाढ़, तो कहीं सूखे का सामना करना पड़ रहा है. हमारी सरकार ने विद्युत दाह गृह तो बनाए हैं, पर कैसी विडम्बना है. आवश्यकता पड़ने पर निष्क्रिय अवस्था में पाए जाते हैं. उनमें से एक है हमारे सत्यनगर का विद्युत दाहगृह. उन्होंने कहा कि हम भुवनेश्वर निवासियों का आपसे सविनम्र निवेदन है इनके सुचारू रूप से चलने की ओर भी आप कुछ कदम उठाएँ. चाहे उनका दायित्व कुछ सरकारी अधिकारियों को या कुछ निजी संस्थानों को प्रदान करने की कृपालता करें. यह हमारे स्वच्छता अभियान तथा स्मार्ट सिटी की ओर एक और कदम होगा.

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