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पांच फरवरी को पश्चिम ओडिशा में चक्का जाम 

  •  हाईकोर्ट प्रसंग

संबलपुर। हाईकोर्ट की स्थायी बेंच स्थापित किए जाने की मांगपर आगामी 5 फरवरी पूरे पश्चिम ओडिशा में चक्का जाम कर दिया जाएगा। पश्चिम ओडिशा अधिवक्ता क्रियानुष्ठान कमेटी की ओर से यह फैसला लिया गया है। इस मुद्दे पर बातचीत हेतु जिला अधिवक्ता संघ के कार्यालय में केन्द्रीय कोर कमेटी की बैठक हुई। जिसमें हाईकोर्ट स्थापना के मुद्दे पर केन्द्र एवं प्रदेश सरकार की टालमोल रवैए की निंदा की गई। जिसके बाद आगामी 5 फरवरी को पूरा पश्चिम ओडिशा बंद करने का फैसला लिया गया। जिला अधिवक्ता संघ की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि पांच फरवरी को पूरे पश्चिम ओडिशा को अचल कर दिया जाएगा। वाहनों की आवाजाही पर पाबंदी रहेगी। साथ ही दुकान-बाजार एवं अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भी बंद कराया जाएगा। सरकारी एवं गैर सरकारी कार्यालयों के साथ कोर्ट-कचहरी के काम को भी बंद करा दिया जाएगा। विज्ञप्ति में कहा गया है कि उन्होंने बंद की जानकारी अंचल के विभिन्न सामाजिक संगठन, बार एसोसिएशन एवं अन्य संस्थानों को मामले की जानकारी दे दी गई है।  साथ ही बंद को सफल बनाने हेतु कमेटी की एक विशेष टीम को भवानीपटना, बरगढ़ एवं राउरकेला बार से संपर्क करने हेतु नियुक्त किया गया है। दूसरी ओर हाईकोर्ट बेंच स्थापना के मुद्दे पर आज दूसरे दिन भी नेल्सन मंडेला चौक में धरना दिया गया। जिसमें शहर के अनेकों लोग शामिल हुए। अदालत के जज अपने निर्धारित समय पर कोर्ट पहुंचे, किन्तु आंदोलनकारियों के आगे उनकी नहीं चली और उन्हें घर वापसी का रास्ता तय करना पड़ा। दूसरे दिन कोर्ट कचहरी का काम बाधित रहा। मसलन संबलपुर जिला के दूर-दराज से आनेवाले लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। दूसरे दिन भी जिला कार्यालय एवं आरडीसी कार्यालय समेत अन्य कार्यालयों में कामकाज नहीं हो पाया।

जिला कांग्रेस ने पश्चिम ओडिशा बंद को समर्थन दिया

जिला कांग्रेस कमेटी ने पश्चिम ओडिशा अधिवक्ता क्रियानुष्ठान कमेटी द्वारा आगामी 5 फरवरी को आहूत पश्चिम ओडिशा बंद को अपना समर्थन दिया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष अश्विनी गुरू ने बताया कि पश्चिम ओडिशा में हाईकोर्ट स्थापना की मांग न्यायोचित है। दशकों से अंचल की आवाम इस मुद्दे पर आंदोलन कर रही है। किन्तु केन्द्र एवं प्रदेश सरकार मामले पर राजनीति कर पश्चिम ओडिशा की जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास कर रही है। प्रदेश सरकार एक सोची समझी राजनीति के तहत आंदोलित अधिवक्ताओं के मामलों को अन्यत्र स्थानांतरित करने का प्रयास कर रही है। साथ ही आंदोलित अधिवक्ताओं के लाईसेंस को रद्दे किए जाने संबंधित प्रदेश कानून परिषद की सिफारिश भी चिंता बढ़ानेवाला है। जिला कांग्रेस प्रदेश सरकार एवं प्रदेश कानून परिषद के इस फैसले की निंदा करता है। साथ ही कांग्रेस इस न्यायोचित मांग के साथ हमेशा खड़ी है। आगामी पांच फरवरी को कांग्रेस के कार्यकर्ता इस आंदोलन में शामिल होंगे ओर हाईकोर्ट स्थापना के मुद्दे पर उठायी गई आवाज को और बुलंद करने का प्रयास करेंगे।

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