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लक्ष्मण लाल महिपाल ने संघर्ष में रची सफलता की कहानी

  • अपनी काबिलयत के बल पर लहाराया परचम

अशोक पाण्डेय, भुवनेश्वर

आज सफलता की शिखर पर पहुंचे लक्ष्मण लाल महिपाल ने संघर्ष में अपनी सफलता की कहानी रची है. अपने पिता के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत की बदौलत आज वह परिचय के मोहताज नहीं हैं. उद्योग का जगत हो या समाजसेवा, सभी जगहों पर लक्ष्मण लाल महिपाल की भावना सबके दिलों पर राज करती है.

उद्योगपति लक्ष्मणलाल महिपाल का जन्म 12 जुलाई, 1941 को राजस्थान मादरा के एक संयुक्त परिवार में हुआ. इनके पिताजी स्वर्गीय विश्वनाथ महिपाल, माताजी स्वर्गीया गीता देवी महिपाल तथा इनकी पत्नी श्रीमती कौसिल्या देवी महिपाल इनके जीवन की वास्तविक प्रेरणा हैं. इनके चाहनेवाले इन्हें अपने-अपने शब्दों में ढालते हैं. इन्होंने अपने बाल्यकाल में अपने पारिवारिक संबंधों को विशेष महत्त्व दिया. श्री लक्ष्मणलाल महिपाल ने कोलकाता से आकर बी.कॉम. किया. उन दिनों औद्योगीकरण पर काफी जोर था, जिसके कारण उन्होंने अपनी एम.कॉम की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और उद्योग की दुनिया में प्रवेश किया. इनके स्वर्गीय दादाजी इनको हमेशा कहा करते थे कि चिंता नहीं, चेष्टा करनी चाहिए. जब श्री लक्ष्मणलाल महिपाल को वे सोते हुए देखते थे, तब कहते थे कि अगर बिस्तर नहीं छोड़ा तो बुढ़ापे में बिस्तर तुम को नहीं छोड़ेगा. इन सभी प्रेरणा के बीच संघर्ष की दौर से गुजरते हुए आज श्री लक्ष्मणलाल महिपाल एक सफल उद्योगपति हैं. अस्सी के दशक में ओडिशा जाजपुर रोड आकर जिस प्रकार से उन्होंने अपने उद्योग का विस्तार किया, उसकी सभी प्रशंसा करते हैं. 21 अगस्त, 1986 को उन्होंने कलिंग एलायज प्राइवेट लिमिटेड आरंभ किया. मारवाड़ी सोसाइटी, भुवनेश्वर से संरक्षक, एफटीएस भुवनेश्वर चैप्टर के पूर्व अध्यक्ष, बाबारामदेव रुणीचावाले मंदिर के अध्यक्ष, जाजपुर रोड गोशाला से आरंभ उद्योगपति श्री लक्ष्मणलाल महिपाल अनेक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं. अपनी सेवाएं जनता के प्रति समर्पित किये हुए हैं. इस बार उनका 80वां जन्मदिन, 12 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा के दिन पड़ा है. इस अवसर पर राजेश-ऋतु, रीतेश-निधि ने अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए उन्हें अपना मार्गदर्शक करार दिया. उनकी कंपनी की टीम ने भी भगवान श्री जगन्नाथ से उनको शतायु बनाने की कामना की है.

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